February 01, 2026
Parle-G Factory: 97 साल पुरानी विरासत का अंत! मुंबई की ऐतिहासिक फैक्ट्री अब बनेगी इतिहास, जानिए क्या है पूरा सच
नई दिल्ली/मुंबई:
भारत में 'चाय' और 'Parle-G' का रिश्ता अटूट है। अमीर हो या गरीब, शायद ही कोई ऐसा घर हो जहां पारले-जी बिस्किट के साथ बचपन की यादें न जुड़ी हों। लेकिन अब इस प्रतिष्ठित ब्रांड से जुड़ी एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने बिस्किट प्रेमियों को थोड़ा भावुक कर दिया है।
मुंबई के विले पार्ले (Vile Parle) इलाके की पहचान रही Parle-G की ऐतिहासिक फैक्ट्री अब इतिहास के पन्नों में दर्ज होने जा रही है। खबर है कि जिस जगह से इस स्वाद का सफर शुरू हुआ था, वहां अब एक विशाल कमर्शियल प्रोजेक्ट खड़ा होगा।
क्या है पूरी खबर? (The Viral News)
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 7 जनवरी 2026 को पर्यावरण विभाग और संबंधित अथॉरिटीज ने इस जमीन के पुनर्विकास (Redevelopment) को मंजूरी दे दी है। यह फैक्ट्री करीब 13.5 एकड़ जमीन पर फैली हुई है। अब यहां पुरानी इमारत को गिराकर एक अत्याधुनिक कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाया जाएगा।
हालांकि, पाठकों को बता दें कि इस फैक्ट्री में बिस्किट का उत्पादन साल 2016 में ही बंद कर दिया गया था, लेकिन यह इमारत पारले की विरासत (Legacy) का प्रतीक थी।
1929 से शुरू हुआ था सफर
पारले प्रोडक्ट्स (Parle Products) की नींव साल 1929 में रखी गई थी। आपको जानकर हैरानी होगी कि शुरुआत में यहां बिस्किट नहीं, बल्कि टॉफी और कैंडी (जैसे ऑरेंज बाइट) बनाई जाती थीं।
1939 में बदला इतिहास: कंपनी ने बिस्किट बनाना शुरू किया।
आजादी का गवाह: यह फैक्ट्री भारत की आजादी से पहले से खड़ी है और इसने देश के हर बदलाव को देखा है।
नाम का राज: मुंबई के 'विले पार्ले' इलाके के नाम पर ही कंपनी का नाम 'Parle' पड़ा।
पैकेट वाली 'गर्ल' का सच क्या है?
Parle-G के पैकेट पर छपी प्यारी सी बच्ची की तस्वीर को लेकर सालों से कई दावे किए जाते रहे हैं। कभी इसे नीरू देशपांडे बताया गया तो कभी सुधा मूर्ति। लेकिन कंपनी ने खुद इस राज से पर्दा उठाया था।
सच्चाई यह है कि यह किसी असली बच्ची की फोटो नहीं है। यह एक इलस्ट्रेशन (चित्र) है जिसे 1960 के दशक में मशहूर कलाकार मगनलाल दहिया (Maganlal Dahiya) ने डिजाइन किया था। यह तस्वीर आज भी मासूमियत और भरोसे का प्रतीक बनी हुई है।
क्या बाजार में बिस्किट मिलना बंद हो जाएगा? (Fact Check)
सोशल मीडिया पर कई बार भ्रामक खबरें फैलती हैं। मीडिया जगत अपने पाठकों को स्पष्ट करता है कि Parle-G बिस्किट बंद नहीं हो रहा है। केवल विले पार्ले स्थित पुरानी निष्क्रिय फैक्ट्री का रिडेवलपमेंट हो रहा है। देश भर में कंपनी की 130 से ज्यादा अन्य मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं, जहां आपका पसंदीदा बिस्किट बदस्तूर बन रहा है।
निष्कर्ष: यादों में हमेशा जिंदा रहेगा स्वाद
भले ही विले पार्ले की वह इमारत अब नए रूप में नजर आएगी, लेकिन Parle-G का स्वाद और उससे जुड़ी भावनाएं हमेशा भारतीयों के दिलों में रहेंगी। यह सिर्फ एक बिस्किट नहीं, बल्कि भारत का 'Comfort Food' है।
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